August 5, 2026

बिग ब्रेकिंग-पूर्व मंत्री हरकसिंह रावत पर अब लगे ये बड़े आरोप ।

उत्तराखण्ड। एक बड़ी खबर आपको बता दें कि जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पूर्व मंत्री हरकसिंह रावत को लेकर क़ई खुलासे करने का दावा किया है।

उन्होंने कहा है कि जालसाजी के मास्टरमाइंड हरक ने फर्जी मां- बेटा तैयार कर शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा की भूमि हड़प ली है । रघुनाथ सिंह बताते हैं कि इस खेल की शुरुआत अप्रैल 2003 में फर्जी हस्ताक्षरित आवेदन से हुई। जिसमे आवेदिका की मृत्यु 1974 में हो चुकी थी।

वहीं अप्रैल 2003 में हरक सिंहः ने जिलाधिकारी को इस जमीन की दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए थे।विकासनगर -जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में हरक सिंह रावत ने राजस्व मंत्री बनते ही मात्र एक साल के भीतर ही शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा जमीन पर ऐसी नियत भरी । उन्होंने फर्जी सुशीला रानी के नाम से फर्जी हस्ताक्षरित पत्र स्वयं के नाम लिखवाया, जिसमें 7/4/2003 को इनके द्वारा जिलाधिकारी को सुशीला रानी के नाम दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में कागजात में सुशीला रानी का नाम दर्ज हो गया | सुशीला रानी का नाम दर्ज कराने से पहले ही बड़ी चालाकी से हरक सिंह ने अपने करीबी पीए/ पीआरओ वीरेंद्र कंडारी (समीक्षा अधिकारी) के नाम 5/12 /2002 को फर्जी महिला एवं फर्जी बेटा (जोकि विकासनगर ब्लॉक का रहने वाला है) प्रस्तुत कर नई दिल्ली में पावर ऑफ अटॉर्नी संपादित करा ली , जबकि सुशीला रानी की मृत्यु वर्ष 1974 में हुई, ऐसे साक्ष्य मिले हैं |हैरानी की बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी से मात्र 3 माह पहले सुशीला रानी उर्फ सावित्री देवी वर्मा ने अपने पुत्र भीमसेन वर्मा के नाम वसीयत संपादित कराई थी, जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर के रूप में सावित्री देवी वर्मा लिखा था, लेकिन पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी लिखा था, इस प्रकार दोनों दस्तावेजों में विरोधाभास था | सवाल यह है कि क्या दो नाम से प्रचलित व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अलग-अलग नाम से कर सकता है ! पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करते ही हरक सिंह ने अपने खास राजदार वीरेंद्र कंडारी के जरिए अपनी पत्नी दीप्ति रावत के नाम 4.663 हेक्टेयर यानी 60 बीघा भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) करा दिया ,जिसमें बड़ी चालाकी से पति हरक सिंह के नाम की जगह पिता का नाम दर्शाया गया तथा पता भी गढ़वाल का दर्शाया गया तथा इसी प्रकार अपनी करीबी लक्ष्मी राणा के नाम 3.546 हेक्टेयर यानी 47 बीघा भूमि का बैनामा करा दिया, जिसमें पता गढ़वाल का दर्शाया गया, जिससे किसी को कोई संदेह पैदा न हो | उक्त फर्जीवाड़े के चलते कई विवाद उत्पन्न हुए एवं उक्त विवादों के चलते वर्ष 2009 में अपर जिलाधिकारी (प्रशा) द्वारा उक्त भूमि को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने हेतु उप जिलाधिकारी, विकासनगर को निर्देश दिए थे तथा उक्त फर्जीवाड़े के मामले में थाना सहसपुर में वर्ष 2011 में भी मुकदमा कायम किया गया था । अन्य कई घोटाले भी उनके नाम दर्ज हैं । मोर्चा सरकार से मांग करता है कि उक्त जमीन को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित कर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई करे अन्यथा भ्रष्टाचार रोधी ऐप एवं बड़ी-बड़ी बातें करना बंद करे ।पत्रकार वार्ता में- दिलबाग सिंह व ओ.पी. राणा मौजूद थे ।

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