बिग ब्रेकिंग –आरटीआई कार्यकर्ता से दुर्व्यवहार के मामले में इन अधिकारियों को राज्य सूचना आयोग की फटकार। निंदा प्रस्ताव हुआ पारित। नियुक्तियों को लेकर मांगी थी सूचना।

by | Sep 12, 2023 | उत्तराखण्ड, देहरादून, शिक्षा | 0 comments

उत्तराखंडसूचना का अधिकार के अन्तर्गत सूचना मांगने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी/अपर निदेशक सीमैट, देहरादून अजय नौडियाल और लोक सूचना अधिकारी सीमैट देहरादून दिनेश गौड़ को सूचना देने के दौरान आर टी आई कार्यकर्ता के साथ अपीलीए सुनवाई के समय अभद्र दुर्व्यव्यवहार करने पर उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग द्वारा निंदा आदेश पारित किया गया और दोनों अधिकारियों को भविष्य में इस तरह के व्यवहार पर सूचना का अधिकार 2005 के प्रावधान के अन्तर्गत कार्यवाही की चेतावनी दी गई।


आपको बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णानंद डिमरी द्वारा सिमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान) देहरादून में नियुक्तियों को लेकर सूचनाएं मांगी गई थी । डिमरी द्वारा यहां छात्रावास अधीक्षक के पद पर हुई नियुक्ति के संबंध में 6 बिंदुओ पर सूचना मांगी गई थी । विभागीय अपीलीय सुनवाई के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णानंद डिमरी के साथ विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी/अपर निदेशक सीमैट देहरादून अजय नौडियाल और लोक सूचना अधिकारी सीमैट देहरादून दिनेश गौड़ द्वारा दुर्व्यव्यवहार किया गया जिसका संज्ञान अब राज्य सूचना आयोग द्वारा लिया गया है और दोनो के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया

क्या है सीमैट में नियुक्ति और प्रतिनियुक्तियों में खेल?

देहरादून शिक्षा निदेशालय स्थित राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिमैट) में इसके गठन से ही नियुक्ति और प्रतिनियुक्तियों में बड़ा खेल चल रहा है । यहां होने वाली प्रतिनियुक्तियों को लेकर कोई मानक ही नही हैं क्योंकि अबतक इस संस्थान का ढांचा ही तैयार नही हो पाया। बिना नियमावली के चलने वाले संस्थान में अनियमित्तताए भी कितनी होती होंगी इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब आरटीआई कार्यकर्ता ने छात्रावास अधीक्षक के पद पर बिना विज्ञप्ति के ही हुई नियुक्ती के संबंध में सूचना मांगी तो विभागीय सूचना अधिकारी आरटीआई कार्यकर्ता के साथ ही दुर्व्यवहार करने लगे।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में इस संस्थान की नियमावली शासन में लटकी हुई है या यूं कहें कि अधिकारियों ने अपनी सहूलियत के मुताबिक जबरदस्ती नियमावली लटकाई हुई है।
बड़े ही अफसोस की बात है कि शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संस्थान में ही जब इतनी अनियमितताये हैं तो कैसे शिक्षा की गुणवत्ता सही बनाई जाएगी।