बिग ब्रेकिंग–ये कैसी राजनीति?थराली विधायक भूपालराम टम्टा ने पूर्व विधायक दिवंगत मुन्नी देवी शाह को श्रद्धांजलि देना तक नहीं समझा मुनासिब

by | Aug 19, 2025 | Breaking, उत्तराखंड, उत्तराखण्ड, खबर हटकर, चमोली, ताज़ा ख़बरें, देहरादून, न्यूज़ | 0 comments

*राजनीति और मानवीय संवेदनाएं!!*
*थराली विधायक भूपालराम टम्टा ने पूर्व विधायक दिवंगत मुन्नी देवी शाह को श्रद्धांजलि देना तक नहीं समझा मुनासिब।*

चमोली। हाल ही में थराली की पूर्व विधायक मुन्नी देवी शाह का निधन हुआ था जिसके बाद मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री ,विधायक तक कई लोगों ने शोक व्यक्त किया लेकिन थराली विधायक भूपालराम टम्टा ने शोक व्यक्त करना भी मुनासिब नहीं समझा।
वहीं गैरसैंण सत्र के दौरान भी लगभग सभी जन प्रतिनिधियों ने इस दुखद घटना पर शोक प्रकट किया लेकिन खबर है कि थराली विधायक भूपालराम टम्टा ने शोक प्रकट तक नहीं किया। जबकि सबसे पहले उन्हीं को करना चाहिए था क्योंकि एक तो वो उसी क्षेत्र के वर्तमान विधायक भी हैं जहां से दिवंगत मुन्नी देवी शाह और उनके दिवंगत पति मगनलाल शाह विधायक रह चुके हैं। वहीं दोनों ही परिवारों के रिश्तेदारी के भी संबंध हैं ।

पहाड़ों में मृत्यु के बाद पश्तो देने का रिवाज है जिसमें 13वीं से पहले शोक संतप्त परिवार के पास जाकर लोग शोक संवेदना व्यक्त करते हैं लेकिन सुनने में आया कि भूपाल राम टम्टा ने ये भी मुनासिब नहीं समझा।
आखिर ये कैसी राजनीति है कि अपनी ही क्षेत्र की पूर्व विधायक के शोक में टम्टा दो शब्द भी नहीं कह पाए??

खैर विषय यह नहीं है कि वो शोक प्रकट करने परिवार के पास क्यों नहीं गए? उन्होंने क्यों शोक व्यक्त नहीं किया बल्कि विषय सामाजिकता का भी है ।
हमारे पहाड़ों में तो लोग शोक संवेदना व्यक्त करने मीलों पैदल चलकर भी जरूर शोक संतप्त परिवार के पास पहुंचते हैं।

वहीं मुख्यमंत्री धामी ने गैरसैंण में आयोजित सत्र के दौरान दिवंगत मुन्नी देवी शाह को याद करते हुए 2021 में नारायणबगड़ के डुंगरी गांव में आई आपदा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि डुंगरी में आपदा में दो लोगों की मौत के बाद वह अपने सहयोगी श्री सतपाल महाराज और डॉ. धन सिंह रावत के साथ नारायणबगड़ पहुंचे थे। श्री सतपाल महाराज को वहीं जनसमस्याओं की सुनवाई के लिए रूकना पड़ा, जबकि वह और डॉ. धन सिंह रावत पैदल ही डुंगरी गांव के लिए निकल पडे़ थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चार-पांच किलोमीटर की दूरी पर डुंगरी गांव था। खराब स्वास्थ्य होने के बावजूद स्वर्गीय मुन्नी देवी गांव में प्रभावितों के बीच मौजूद थीं। मेरे मना करने के बावजूद वह हमें रिसीव करने के लिए आधे रास्ते तक पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जिस वक्त उनके देहांत की सूचना मिली, वह आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र में थे। इससे कुछ दिन पहले ही वह अस्पताल में उन्हें देखने गए थे। स्वर्गीय मुन्नी देवी के कमजोरी से भरे चेहरे में भी अद्भुत शांति व तेज दिखा था। वह तब भी अपने क्षेत्र के लिए चिंतनशील थीं।
कुलमिलाकर आखिर ये कैसी राजनीति है जब थराली के विधायक ने दुख के इन क्षणों में परिवार को शोक संवेदना देना भी उचित नहीं समझा।